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मंगलवार, 23 जनवरी 2018

कितना सहायक होगा Nari Portal

साल की शुरुआत महिलाओं के लिए सौगात लेकर आया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन पोर्टल नारी http://www.nari.nic.in को लांच कर दिया। इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता है कि सूचना या जानकारी के अभाव में सरकारी स्तर पर किसी भी योजना के बनाने से कोई लाभ जनता तक नहीं पहुंच सकता है। इसलिए जब भी कोई योजना बनाई जाती है, तो उसके प्रचार-प्रसार की भी व्यवस्था की जाती है। इससे लोगों को उन चीजों के बारे में जानकारी मिलती है और वे सीधे उनका लाभ लेने की स्थिति में आ जाते हैं। अगर इस तरह की चीजों पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय सुधि ले रहा है, तो यह प्रशंसा की बात है। नारी पोर्टल के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को मूर्तरूप देने में काफी सुविधा होगी, ऐसी आशा व्यक्त की जा रही है। इसी दिन ई-संवाद नाम से एक वेबसाइट भी शुरू की गई है। देश में महिलाओं और बच्चों के बीच में कई प्रकार के एनजीओ काम करते हैं। इसलिए मंत्रालय चाहता है कि इन एनजीओ से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव हमें मिल सके। ऐसे ही संवाद को स्थापित करने के लिए ई-संवाद शुरू किया जा रहा है। ऐसे किसी भी एनजीओ के बारे में महिलाएं जानकारी जुटा कर अपने एलाके में इसका लाभ भी उठा सकती हैं। फिलहाल यह पोर्टल अभी अंग्रेजी भाषा में ही है, हिंदी भाषा में अभी यह कोई जानकारी नहीं दिखा रहा है।
02 जनवरी को महिला के सशक्तिकरण के लिए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने ऑनलाइन पोर्टल नारीका शुभारंभ कर जनता को सौंप दिया। इस पोर्टल के माध्यम से महिलाएं सरकारी योजनाओं और पहलों की जानकारी आसानी से प्राप्त हो सकेंगी। महिलाओं को अधिकारों, योजनाओं, आर्थिक अवसर, सामाजिक सहयोग, कानूनी सहायता, आवास आदि उपलब्ध कराने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों ने विभिन्न योजनाएं लागू की हैं। परंतु इनके प्रावधानों के प्रति जागरूकता का अभाव है। इन सारी सूचनाओं को एक स्थान पर सुलभ कराने के उद्देश्य से नारीपोर्टल में महिलाओं के कल्याण के लिए 350 सरकारी योजनाओं से संबंधित व अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं। पोर्टल में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के लिए महत्वपूर्ण लिंक दिए गए हैं। नारी पोर्टल जानकारी के लिहाज से अपडेट बनाया गया है। यहां जॉब सर्च की सुविधा भी महिलाओं के लिए उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त मैटेर्निटी लीव, बीमा और बचत-निवेश के बारे में जानकारी, बैंक अकाउंट खोलने, बैंक लोन, पासपोर्ट बनाने आदि की जानकारी पाई जा सकती है।
पोर्टल के पहले पेज पर महिला सुरक्षा संबंधी भाग में महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा, किसी भी प्रकार की हिंसा होने पर उसे रिपोर्ट कराने की जानकारी, शादी के बाद होने वाली परेशानियों में मदद, ऑफिस महिलाओं के साथ होने वाला किसी भी प्रकार के शोषण के बारे में जानकारी और उसके निदान के लिए आवश्यक  सूचनाएं, इसके साथ ही साथ गर्भावस्था के बारे सूचनाएं काफी महत्वपूर्ण हैं। मंत्रालय ने महिला सुरक्षा के संबंध में जो मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स के लिए जारी दिशा-निर्देश, एनआरआई शादी के लिए जारी निर्देशों और सुझावों, साथ ही साइबर अपराधों से सुरक्षा के लिए भी जानकारी इस पोर्टल पर विस्तार से बताया गया है। महिलाओं के बच्चा गोद लेने के संबंध में कई सुधार संबंधी योजना हैं। इसके मद्देनजर इस पोर्टल में गोद लेने की प्रक्रिया, शर्तें आदि बातें यहां बताई गईं हैं। स्वास्थ और पोषण से संबंधित विविध जानकारी का भंडार यहां देने की कोशिश की गई है। पोषण संबंधी टिप्स, जंक फूड संबंधी गाइडलाइन, मातृत्व संबंधी सुझाव, मेंस्ट्रुअल हाईजींन के बारे में भी काफी जानकारी जुटाई गई है। इसमें एक भाग फैमिली प्लानिंग का भी है, जो देश की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए उचित भी है। हमारे यहां महिलाओं की शारीरिक समस्याओं पर तो लोग ध्यान दे देते हैं पर मानसिक समस्याओं को नजरअंदाज करते रहते हैं। इसके प्रति जागरुकता के लिए पोर्टल का एक भाग निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त राज्य और केंद्र सरकार की सारी योजनाओं के बारे में जानकारी यहां मिल सकती है। साथ ही साथ पोर्टल में वोटर आईडी, आधार कार्ड, बैंक अकांउट खोलने, बैंक लोन लेने जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी यहां पाई जा सकती है। कोई भी महिला एक सिंपल क्लिक के बाद यह जानकारी पा सकती है। इन साधारण सी जानकारी के अभाव में महिलाओं को काफी कष्ट उठाने पड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए अधिकांश महिलाएं इस तथ्य से अनभिज्ञ हैं कि कठिन परिस्थितियों में महिलाओं की सहायता के लिए 168 जिलों में वन स्टॉप सेंटर बनाए गए हैं। या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासों के पंजीयन में महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है। तथा कई राज्यों में लड़कियों की शिक्षा के लिए वित्तीय मदद भी दी जाती है। ऐसी जानकारी यहां विभिन्न पोर्टल/वेबसाइट पर बिखरी हुई है।

इस तरह की ढेर सारी जानकारी वास्तव में महिलाओं के पक्ष में है, लेकिन इस पोर्टल को देखते समय प्रश्न यह भी उठता है कि देश की महिलाओं की अशिक्षा, कम्प्यूटर की उपलब्धता और तकनीकी ज्ञान का अभाव ऐसे कारक हैं, जिसकी वजह से इस पोर्टल का लाभ उठाने वालों की संख्या काफी सीमित ही रहेगी। 2011 की जनगणना के अनुसार महिलाओं की साक्षारता दर लगभग 65 फीसदी थी। हमारे यहां अभी भी 35 फीसदी महिलाएं साक्षार नहीं हैं। आंकड़े बताते हैं कि रूरल क्षेत्रों में 100 में से एक लड़की क्लास 12 की पढ़ाई के लिए जा पाती है। साथ ही लगभग 40 फीसदी लड़कियां कक्षा पांच के बाद स्कूल छोड़ देती हैं। मोबाईल फोन प्रयोग के बारे में बात की जाए तो चौथे राष्ट्रीय परिवार-स्वास्थ सर्वे-2015-16 के अनुसार देश में केवल 46 फीसदी महिलाओं के पास खुद का मोबाईल फोन है जिसका वे प्रयोग करती हैं। स्टेटिस्टा के हवाले से बताया जाए तो देश में जहां 71 फीसदी पुरुष इंटरनेट यूज करते हैं वहीं 29 फीसदी महिलाएं ही इंटरनेट प्रयोग करती हैं। इन आंकड़ों में अपनी बात कहे जाने का एक ही अर्थ हैकि ऐसी स्थिति में महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा बनाया गया नारी पोर्टल कितना महिलाओं का होगा और महिलाएं कितना इस पोर्टल का लाभ उठा सकेगीं?

बुधवार, 14 सितंबर 2016

डिजिटल वर्ल्ड की न्यू 'वुमनिया'



एक समय जानीमानी साहित्कार एवं महिला मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी करने वाली मैत्रेयी पुष्पा ने कहा था कि आज गांव-देहात में मोबाइल ने स्त्रियों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान की है। लेखिका का यह कहना बिलकुल वैसे ही है जैसे कभी यूरोपियन देषों में महिला अधिकारों के समर्थकों ने कहा था कि गर्भनिरोधक उपायों ने महिलाओं को कहीं अधिक स्वतंत्र और सक्षम बनाया है। कुछ ऐसा ही तब कहा गया जब हमारे घरों की रसोई में प्रेषर कुकर और गैस-स्टोव ने दस्तक दी। इन बातों से यह पता चलता है कि टेक्नॉलजी ने स्त्रियों के जीवन में ऐसे परिवर्तन किये जिसे हमारे तथाकथित धर्म षास्त्र और तमाम कानून भी एक साथ मिलकर नहीं कर पाए। महिलाओं के हाथों में छह इंची मोबाइल ऐसा हथियार है जिसके सहारे न केवल वे आज अपने सपनों की उड़ान भर रही हैं बल्कि इस मेल डॉमिनेटिंग सोसायटी में अपना एक मुकाम और कोना तलाष रही है।

आजकल एक महिलाओं को लेकर एक नई षब्दावली चल पड़ी है ‘डिजीटल वूमन।’ यानी ऐसी महिलाएं जो खूब नेट सैवी हो और सर्फिंग में रुचि लेती हां। अगर आंकड़ों की भाषा में बात करे तो पुरुषों के मुकाबले 49 फीसदी महिलाएं आज देष में इंटरनेट यूज करती हैं। यानी आधी आबादी का एक लगभग पूरा भाग इंटरनेट का लाभ ले रहा है। इंटरनेट में उनकी उपस्थिति का यही कारण है कि सोषल मीडिया में भी महिलाएं अपनी हिस्सेदारी दिखा रही हैं। चाहे वह सबसे लोकप्रिय सोषल साइट फेसबुक हो या वाट्स-एप, सभी जगह वे अपनी मुखर आवाज के साथ उपस्थित है। ट्वीटर, गूगल प्लस, लिंकलिड्स, ब्लॉग, यू-ट्यूब ये कुछ ऐसी जगहें हैं जहां पर महिलाएं बेखौफ आकर अपने रूटीन लाइफ को आसान करती हैं और बेबाकी से अपने विचार षेयर करती हैं। आज सोषल साइट्स केवल मेट्रो सिटीज या हाई प्रोफाइल महिलाओं के जीवन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यहां पर आम घरेलू महिलाएं बडे़ षिद्दत से आती हैं। हम एक ओर तो वाट्सएप पर अपने पड़ोस की अांटी को किटी पार्टी मैनेज करते हुए देख सकते है, वहीं तेजतर्रार और सफल महिलाओं को देष-दुनिया के तमाम मुद्दों पर बहस में भाग लेते भी देख सकते हैं। ऐसी तमाम महिलाओं की उपस्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि माइक्रो ब्लॉगिंग ट्वीटर पर प्रसिद्ध उद्योपति किरण मजूमदार षॉ काफी सक्रीय हैं, वहीं लोगों का विरोध झेलने वाली पत्रकार एवं टिप्पणीकार सागरिका घोष भी हैं। बोलने के मामले में हद तक बदनाम महिलाएं अपने आपको इस मीडियम के माध्यम से अभिव्यक्त करना चाहती है और इसको आसान किया है डिजिटल टेक्नॉलजी ने। यह देखना बहुत ही दिलचस्प है कि कैसे यह छोटा सा गैजेट वूमेन लाइफ को बदलकर रख दे रहा है। यह क्या कम है कि यह डिजिटल वर्ल्ड महिलाओं के छोटे-मोटे काम ही आसान नहीं कर रहा है बल्कि उनकी सुरक्षा को भी सुनिष्चित कर रहा है।

कुछ सालों से इंटरनेट उपयोग करने वाली कुछ महिलाओं से जब बात की गई तो उन्होंने समानरूप से एक बात कबूल की कि इंटरनेट, सोषल साइट ने उनके जीवन को बदल दिया है। वे पहले से ज्यादा सोषल व एक्टिव हो गई हैं। षादी के बाद जब उन्हें लगता था कि अब स्वयं के लिए कुछ कर पाना न-मुमकिन सा हो गया है या खुद के लिए जिंदगी समाप्त सी हो गई है तब इस डिजिटल वर्ल्ड ने उनके लिए सारा संसार दिखा दिया। इस डिजिटल वर्ल्ड ने उनके लिए जीवन के कुछ नए दरवाजे खोल दिए। इससे वे ऐसी दुनिया के करीब आई हैं जो उनके लिए ‘प्रोहिवेटेड’ थी, लगभग बंद थी। आज सोषल साइट के जरिए देष के उत्तर में रहने वाली एक स्त्री दक्षिण की दूसरी या विदेष में रहने वाली महिलाएं देष की दूसरी महिलाओं के संपर्क में आसानी से आ गई है। जहां वे दिल खोलकर बोल और बतिया रही हैं। यहां पर वे अपने और उनके कष्टों और कठिनाइयों को षिद्दत से सुन और महसूस कर पा रही हैं। महिलाओं के लिए इंटरनेट केवल मनोरंजन या एंटरटेन का साधन मात्र नहीं है बल्कि इंटरनेट का यह कोना ‘ओ वुमनिया’ टाइप का है जो केवल उनके लिए ही है उनके जैसा ही है।